आपने पिछले पाठ में कुछ सवालों के जवाब दिए थे। जहां आपसे विभिन्न तत्वों के बाहरी ऊर्जा स्तर में मौजूद इलेक्ट्रानों की संख्या के बारे में पूंछा गया था।
रसायनशास्त्री सबसे पहले यह जानना चाहते हैं कि - परमाणु के सबसे बाहरी उर्जा स्तर में कितने इलेक्ट्रान होते हैं। इससे उनको तत्व की रायानिक प्रकृति का पता चलता है। तो रसायन विज्ञान पढ़ने के दौरान आप भी ख्याल रखें कि किसी तत्व के परमाणु के सबसे बाहरी स्तर पर कितने इलेक्ट्रान हैं?
आखिर हमें सबसे बाहरी इलेक्ट्रान स्तर में कितने इलेक्ट्रान हैं यह जानने से क्या मदद मिलती है ?
आपके शिक्षक सोडियम धातु से एक प्रयोग को करके दिखाएंगे। इसे ध्यान से देखिएगा।
सोडियम की चमकीली सतह हवा में खुली रखने पर तुरंत ही घूमिल हो जाती है। आखिर क्यों?
पृथ्वी पर हमे हाइड्रोजन तत्व परमाणु के तौर पर नहीं मिलता। वह H2 के अणु सवरूप में मिलता हैं। और यह H2 हमें हवा में गैस के रूप में मिलती है। H2 का मतलब है कि हाइड्रोजन के दो परमाणु आपसे में जुड़े हुए हैं। इसी तरह हाइड्रोजन और भी कई यौगिक (संयोजको ) के सवरूप में मिलता है जिसमे वह अन्य तत्व के परमाणु (ओ ) के साथ जुडा होता है , जैसे – Hcl, H2O, NH3 इत्यादि |
ऐसा क्यों है
आक्सीजन तत्व भी हमें पृथ्वी पर परमाण्विक रूप में - यानी सिर्फ O के रूप में नहीं मिलता। वह भी हमें O2 के स्वरूप में मिलता है।तथा अन्य तत्वों के साथ जुड़ कर वह भी कई सारे योगिको के रूप में पाया जाता है , जैसे H2O , SO2, Na2O, CaO इत्यादि |
अब आप पानी या H2O का ही उदाहरण ले । जिसमें कि आप देख सकते हैं कि हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का ही संयोजन है।
सोडियम हमें NaCl (प्राकृतिक नमक) के स्वरूप में या अन्य संयो जको के स्वरुप में मिलता है। NaCl में भी सोडियम का परमाणु , क्लोरीन के परमाणु से जुड़ा हुआ है। आखिर सोडियम या फिर क्लोरीन स्वंतत्र रूप से क्यों नहीं रह पाते?
लोहा भी ज्यादातर शुद्ध लोहे के तत्व रूप में नहीं मिलता। वह ज्यादातर आयरन आक्साइड के रूप में मिलता है।
एल्युमीनियम के बारे में भी यही है एल्युमीनियम भी ज्यादातर एल्युमीनियम ऑक्साइड के स्वरूप में पाया जाता है |
ऐसा क्यों है?
इस सवाल का जवाब समझने के लिए हमें तत्वों की एक दूसरे के सापेक्ष रासायनिक सक्रियता (रासायनिक प्रकृति) को थोड़ा समझना पड़ेगा। यह रासायनिक सक्रियता किसी तत्व के परमाणु के सबसे बाहरी ऊर्जा कक्ष में मौजूद इलेक्ट्रानों की संख्या पर निर्भर करती है। चलिए अगले पाठ में इसे समझने की एक कोशिश करते हैं।
[Contributed by administrator on 10. Januar 2018 21:13:43]
इलेक्ट्रॉन और तत्वों की रासायनिक सक्रियता
आपने पिछले पाठ में कुछ सवालों के जवाब दिए थे। जहां आपसे विभिन्न तत्वों के बाहरी ऊर्जा स्तर में मौजूद इलेक्ट्रानों की संख्या के बारे में पूंछा गया था।
रसायनशास्त्री सबसे पहले यह जानना चाहते हैं कि - परमाणु के सबसे बाहरी उर्जा स्तर में कितने इलेक्ट्रान होते हैं। इससे उनको तत्व की रायानिक प्रकृति का पता चलता है। तो रसायन विज्ञान पढ़ने के दौरान आप भी ख्याल रखें कि किसी तत्व के परमाणु के सबसे बाहरी स्तर पर कितने इलेक्ट्रान हैं?
आखिर हमें सबसे बाहरी इलेक्ट्रान स्तर में कितने इलेक्ट्रान हैं यह जानने से क्या मदद मिलती है ?
आपके शिक्षक सोडियम धातु से एक प्रयोग को करके दिखाएंगे। इसे ध्यान से देखिएगा।
सोडियम की चमकीली सतह हवा में खुली रखने पर तुरंत ही घूमिल हो जाती है। आखिर क्यों?
पृथ्वी पर हमे हाइड्रोजन तत्व परमाणु के तौर पर नहीं मिलता। वह H2 के अणु सवरूप में मिलता हैं। और यह H2 हमें हवा में गैस के रूप में मिलती है। H2 का मतलब है कि हाइड्रोजन के दो परमाणु आपसे में जुड़े हुए हैं। इसी तरह हाइड्रोजन और भी कई यौगिक (संयोजको ) के सवरूप में मिलता है जिसमे वह अन्य तत्व के परमाणु (ओ ) के साथ जुडा होता है , जैसे – Hcl, H2O, NH3 इत्यादि |
ऐसा क्यों है
आक्सीजन तत्व भी हमें पृथ्वी पर परमाण्विक रूप में - यानी सिर्फ O के रूप में नहीं मिलता। वह भी हमें O2 के स्वरूप में मिलता है।तथा अन्य तत्वों के साथ जुड़ कर वह भी कई सारे योगिको के रूप में पाया जाता है , जैसे H2O , SO2, Na2O, CaO इत्यादि |
अब आप पानी या H2O का ही उदाहरण ले । जिसमें कि आप देख सकते हैं कि हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का ही संयोजन है।
सोडियम हमें NaCl (प्राकृतिक नमक) के स्वरूप में या अन्य संयो जको के स्वरुप में मिलता है। NaCl में भी सोडियम का परमाणु , क्लोरीन के परमाणु से जुड़ा हुआ है। आखिर सोडियम या फिर क्लोरीन स्वंतत्र रूप से क्यों नहीं रह पाते?
लोहा भी ज्यादातर शुद्ध लोहे के तत्व रूप में नहीं मिलता। वह ज्यादातर आयरन आक्साइड के रूप में मिलता है।
एल्युमीनियम के बारे में भी यही है एल्युमीनियम भी ज्यादातर एल्युमीनियम ऑक्साइड के स्वरूप में पाया जाता है |
ऐसा क्यों है?
इस सवाल का जवाब समझने के लिए हमें तत्वों की एक दूसरे के सापेक्ष रासायनिक सक्रियता (रासायनिक प्रकृति) को थोड़ा समझना पड़ेगा। यह रासायनिक सक्रियता किसी तत्व के परमाणु के सबसे बाहरी ऊर्जा कक्ष में मौजूद इलेक्ट्रानों की संख्या पर निर्भर करती है। चलिए अगले पाठ में इसे समझने की एक कोशिश करते हैं।