परमाणु के दो तरह के मॉडल - जिसमें इलेक्ट्रान मेघ के रूप प्रदर्शित हैं और दूसरे में व्यवस्थित तौर पर कक्ष में घूमते दिखाएं गएं हैं।
परमाणु तीन तरह के मुलभूत कणों से मिलकर बने होते हैं। परमाणु के क्रेंद्र में प्रोटोन और न्यूट्रान होते हैं। और इलेकट्रान चारों ओर चक्कर लगाते हैं।
यह इतनी वेग से घूम रहे होते हैं कि पता करना नामुमकिन होता है कि परमाणु के आस-पास किस समय इलेक्रट्रान कहां पाया जा सकता है ।
हमारे समझने के लिए वैज्ञानिकों ने परमाणु का एक मॉडल प्रस्तुत किया है। ताकि हमें परमाणु और उसके विभिन्न हिस्सों के बारे में दृश्यात्मक तरीक से सोचने में आसानी हो। तो इसी चित्र को परमाणु मत समझ बैठना।
परमाणु के बारे में
परमाणु के केंद्र में प्रोटॉन होते हैं। जो धनावेशित होते हैं।
परमाणु के केंद्र में ही न्यूट्रान भी होते हैं। जिन पर कोई आवेश नहीं होता। प्रोटोन और न्यूट्रान के सहित के केंद्र को परमाणु नाभिक भी कहते है।
किसी भी तत्व के परमाणु में प्रोटोन की जो संख्या होती है उसे उस तत्वका एटोमिक नंबरयापरमाणु संख्या कहते हैं। इस तरह हरेक तत्व का एटोमिक नंबर भिन्न् होता हैक्युकीहरएकतत्वमेंप्रोटोनोकीसंख्याभिन्नहोतीहै | आप देखेंगे कि आवर्त सारिणी की संरचना में तत्वों को उनकी एटोमिक नंबर के बढ़ते क्रम के आधार पर जमाया गया है।
प्रोटान और न्यूट्रान परमाणु के सबसे भारी अंग हैं। इनका भार लगभग बराबर ही होता है।
जब हमकिसीपरमाणु के भार की बात करते हैं तो यहलगभगउसपरमाणुकेनाभिकमेंरहरहेसारेप्रोटोनऔरन्यूट्रानका मिला जुला भार ही होता हैतथापरमाणु के भार में उसके इलेक्ट्रॉन्स के कुल भार का योगदान लगभग नगण्य होता है |
इलेक्ट्रान नाभिक के चारों अलग अलग उर्जा स्तरों में प्रकाश की गति से घूमते हैं और प्रत्येक इलेक्ट्रान नाभिक के चारो ओर पर्टिकुलर पैटर्न में फैला हुआ होता है | इन्हें इलेक्ट्रान बॉदल भी कहते हैं। हकीकत में यह बताना बहुत मुश्किल होता है कि कोई इलेकट्रान किसी निश्चित समय पर किस निश्चित जगह पर होगा | बल्कि परमाणु के नाभिक के आसपास के किसी हिस्से में एलेक्ट्ग्रों के पाये जाने की संभावना का केवल अंदाजा ही लगाया जा सकता है |
समझाने में आसानी हो केवल इसीलिए हम इन्हें नाभिक के चारों ओर गोल चककरों में घूमता हुआ दिखाते हैं।
विज्ञान की भाषा में इसे परमाणु का मॉडल कहते हैं न कि परमाणु का वास्तविक सवरूप |
उपर हमने जो सोचा समझा उस परमाणु मॉडल को बनाने का एक प्रयास करते है |
[Contributed by administrator on 10. Januar 2018 21:13:29]
परमाणु का एक मॉडल
परमाणु के दो तरह के मॉडल - जिसमें इलेक्ट्रान मेघ के रूप प्रदर्शित हैं और दूसरे में व्यवस्थित तौर पर कक्ष में घूमते दिखाएं गएं हैं।
परमाणु तीन तरह के मुलभूत कणों से मिलकर बने होते हैं। परमाणु के क्रेंद्र में प्रोटोन और न्यूट्रान होते हैं। और इलेकट्रान चारों ओर चक्कर लगाते हैं।
यह इतनी वेग से घूम रहे होते हैं कि पता करना नामुमकिन होता है कि परमाणु के आस-पास किस समय इलेक्रट्रान कहां पाया जा सकता है ।
हमारे समझने के लिए वैज्ञानिकों ने परमाणु का एक मॉडल प्रस्तुत किया है। ताकि हमें परमाणु और उसके विभिन्न हिस्सों के बारे में दृश्यात्मक तरीक से सोचने में आसानी हो। तो इसी चित्र को परमाणु मत समझ बैठना।
परमाणु के बारे में
परमाणु के केंद्र में प्रोटॉन होते हैं। जो धनावेशित होते हैं।
परमाणु के केंद्र में ही न्यूट्रान भी होते हैं। जिन पर कोई आवेश नहीं होता। प्रोटोन और न्यूट्रान के सहित के केंद्र को परमा
णु नाभिक भी कहते है।
किसी भी तत्व के परमाणु में प्रोटोन की जो संख्या होती है उसे उस तत्व का एटोमिक नंबर या परमाणु संख्या कहते हैं। इस तरह हरेक तत्व का एटोमिक नंबर भिन्न् होता है क्युकी हर एक तत्व में प्रोटोनो की संख्या भिन्न होती है | आप देखेंगे कि आवर्त सारिणी की संरचना में तत्वों को उनकी एटोमिक नंबर के बढ़ते क्रम के आधार पर जमाया गया है।
प्रोटान और न्यूट्रान परमाणु के सबसे भारी अंग हैं। इनका भार लगभग बराबर ही होता है।
जब हम किसी परमाणु के भार की बात करते हैं तो यहलगभग उस परमाणु के नाभिक में रह रहे सारे प्रोटोन और न्यूट्रानका मिला जुला भार ही होता है तथा परमाणु के भार में उसके इलेक्ट्रॉन्स के कुल भार का योगदान लगभग नगण्य होता है |
इलेक्ट्रान नाभिक के चारों अलग अलग उर्जा स्तरों में प्रकाश की गति से घूमते हैं और प्रत्येक इलेक्ट्रान नाभिक के चारो ओर पर्टिकुलर पैटर्न में फैला हुआ होता है | इन्हें इलेक्ट्रान बॉदल भी कहते हैं। हकीकत में यह बताना बहुत मुश्किल होता है कि कोई इलेकट्रान किसी निश्चित समय पर किस निश्चित जगह पर होगा | बल्कि परमाणु के नाभिक के आसपास के किसी हिस्से में एलेक्ट्ग्रों के पाये जाने की संभावना का केवल अंदाजा ही लगाया जा सकता है |
समझाने में आसानी हो केवल इसीलिए हम इन्हें नाभिक के चारों ओर गोल चककरों में घूमता हुआ दिखाते हैं।
विज्ञान की भाषा में इसे परमाणु का मॉडल कहते हैं न कि परमाणु का वास्तविक सवरूप |
उपर हमने जो सोचा समझा उस परमाणु मॉडल को बनाने का एक प्रयास करते है |